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पागलपन की चरम सीमा…अरविंद केजरीवाल

Posted On 19 Nov, 2016 में

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आज़ाद भारत के साथ सबसे बड़ा मज़ाक मिस्टर अरविंद केजरीवाल जो क़ि इन दिनों भारत में पागल के पर्यायवाची हो रखे राहुल गाँधी से भी दो कदम आगे निकल चुके हैं ! जहाँ मनोरंजन की दुनिया में राहुल गाँधी अपनी बचकानी हरकतों के बलबूते प्रथम स्थान पर हैं वही गंदगी फैलाने में आम आदमी का मुखौटा पहने अरविंद केजरीवाल योग्यता सूची में पहले पायदान पर हैं ! गर्मियों में जैसे छोटे बच्चे को घरवाले हाफ चड्डी या फूल पैंट पहनाते हैं और वो वापस खोल देता हैं फिर पहनाते हैं बच्चा फिर वापस खोल देता हैं बच्चे की यह बाल क्रीड़ा सबको भाती हैं सबके चेहरे पर हँसी भी आती हैं क्योंकि वो बच्चा होता हैं जो सबको प्यारा लगता हैं ! यही बाल क्रीड़ा अब अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं रोज रोज नंगे हो जाते हैं पैंट पूरी पहनते ही नही कि फिर से नंगे हो जाते हैं ! उनका इस तरह रोज नंगा होना आम लोगो को रास नही आना क्योंकि अब वो बाल्यावस्था से काफ़ी आगे बढ़ चुके हैं एक परिवार का मुखिया भी इनकी तरह हर मुद्दे या बहस पर नंगा नही होता ये तो आख़िर मुख्यमंत्री हैं लेकिन लगता हैं इनका पागलपन अपनी चरम सीमा पर हैं, इनकी मानसिक स्थिति की जाँच होना ज़रूरी हैं इनका या तो डॉक्टरी इलाज हैं या फिर किसी तांत्रिक के ताबीज़ की इनको तुरंत ज़रूरत हैं ! अभी तक तो शुक्र हैं ममता दीदी से राखी ही बँधवाई हैं आगे जाकर विधा बालन की तरह बंगाली में आमी जे तोमार शुधु जे तोमार नही करने लग जाएँ ! क्योंकि जब ममता दीदी सड्फडोसी की तमन्ना अब हमाड़े दिल में हैं कर सकती हैं तो केजरीवाल तो आराम से बंगाली में आमी जे तोमार शुधु जे तोमार कर लेंगे ! वैसे भी उनको घाट घाट का पानी पीना ज़्यादा ही पसंद हैं ! मोदी जी सबसे ज़्यादा चिंतित दो चीज़ो की गंदगी से हैं पहला तो माँ गगें की गंदगी से और दूसरा इस नंगे की गंदगी से ! लोगो ने गधे के माथे पर चंदन लगाया मगर नतीजा ग़धा रोज गंदगी के ढेर में सर डालकर ढेँचो ढेँचो करने लगता हैं ! वहाँ सताधारी पार्टी के महामहिम मोदी जी कोई काम करे और यहाँ एक राज्य स्तरीय लावारिश पार्टी के कथित प्रधान केजरीवालजी का मातम शुरू ! आख़िर ये हो गयी वही बात जैसे आसमान में बिजली चमके और ग़धा मारे लात !
जितेंद्र अग्रवाल “जीत”
मुंबई

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
November 20, 2016

जितेंद्रजी, बहुत सुन्दर ! ये केजरीवाल नहीं लोग इसे केजरीवाल बोलने लगे हैं ! इस महाशय का अपनी कोइ सोच नहीं है न इसके अपने कपडे है, ममता दीदी को भी दिल्ली में ऐसे पागल की दरकरार थी ! लेख के लिए साधुवाद !

JITENDRA HANUMAN PRASAD AGARWAL के द्वारा
November 21, 2016

हार्दिक आभार प्रतिक्रिया के लिए…


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