शब्द बहुत कुछ कह जाते हैं...

कुछ हक़ीकत से रूबरू...कुछ मन की गुफ्तगू...

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एक फ़र्क…..

Posted On: 24 Aug, 2016 Junction Forum,Celebrity Writer,lifestyle में

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वो टूट चुका हैं फिर भी उदास नही हैं !
आख़िर क्या उसमे हैं जो मेरे पास नही हैं !

मैं जीता हूँ छिपकर गम के साये में
आख़िर क्यों हँसी चेहरे पर मेरे आज नही हैं !

रोता वो भी हैं कभी कभी किसी बात पर
उसके आँसुओं में ज़रा भी मगर गम का आभास नही हैं !

मैं कोसता हूँ तकदीर को हर नाकामयाबी पर
मगर उसको तकदीर के फ़ैसले पर कोई एतराज नही हैं !

मैं डरता हूँ क़ि कही नाकाम ना हो जाऊं
जाने क्यों अपने ही इरादों पर मुझे विश्वास नही हैं

सोचा बहुत एक रात मैने तो जाना फ़र्क ये “जीत”
उसके सर आकाश हैं मगर मेरे सर आकाश नही हैं !

जितेंद्र अग्रवाल “जीत”
मुंबई..मो. 08080134259



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 28, 2016

प्रिय जितेन्द बहुत ही नैराश्य से भरी कविता लेकिन सुंदर कविता

JITENDRA HANUMAN PRASAD AGARWAL के द्वारा
August 29, 2016

बहुत आभार माताश्री !

JITENDRA HANUMAN PRASAD AGARWAL के द्वारा
August 29, 2016

बेसूध बेहोश सी हो जाती हैं जब जिंदगी….शब्दों के कुछ छींटे मार लेता हूँ खुद को जिंदा रखने के लिए !


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